जन्म से लेकर मरत तक घुस देवत म जिन्दगी पहा जाथे

हमर देश ह अंग्रेज मन के 200 साल तक गुलाम रहिस हावय, लेकिन ओ समय म नियम कानून कायदा डर भैय रिती रिवाज तको हर अति रहिस हावय। कोनो कुछु…
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छत्तीसगढ़ी कहानी –  कुंदरा 

पांच हाथ के लुगरा , चिरहा अऊ मइलाहा जतका छेदा हावय तौन ला पहेनइयां हा नइ जाने फेर मनचलहा मरदजात मन जान डारे हावय । उँही ला माड़ी के उप्पर…
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कहिनी- सुखिया

रोजगार गारंटी के चार गोदी खने के बाद अपन खेत के चार डंगनी खंती खन के भरे मंझनिया जरत-भुंजावत  सुखिया बाई ह जब अपन घर पहुंचिस,तव अभी तलक ओकर नवा…
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नान्हे कहिनी – जाड़

आँसो जाड़ अबड़ दवें लगिस।जाड़ के मारे हाथ-पाँव किन-किनाय,पानी करा कस चट ले जनाय ,दिन भर सुर्रा चलय त जुड़ के मारे नाक ह सुरुक -सुरुक बोहाय।सँझा- बिहनिया सब ल…
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ग्रामीण परिवेश के अंतर्गत एक निश्छल औरत , सरल-सहज व्यक्ति एवं एक सच्चा मित्र के मानवीय व्यक्तित्व को उजागर करती छत्तीसगढ़ी कहानी

नवा बिहान     ” का करत हस भवजी…? ” हूँद करावत रोहित ह पदुम घर निंगीस । वो जानत-राहय की पदुम अभी घर मं नइ कहिके । वोत्काच्जान वोला…
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