सभी कलाकार साथियों को सादर समर्पित

कलाकारों का रूदन,कर्म को है वंदन......
हालतों और परिस्थितियों के बीच एक रूदन कि जीजीविषा होती है।स्थिति परिस्थिति से लडकर जो साहिल को छूले उसे उसे सच्चा नाविक कहते हैं।और सुर साधना के साथ जो हर आपदा को सहर्ष स्वीकार कर ले वही सच्चा कलाकार हैं।इन्हीं निम्न भावनात्मक अभिव्यक्ति का एहसास है,लिखित कविता का संदर्भ.....

सभी कलाकार साथियों के लिए सादर समर्पित......
कोरोना के आगाज से,
स्वर स्तब्ध और साज हैं.....
स्वर लहरिया खामोश,
अलंकार से सुनी आवाज हैं....
प्रतिभाए ताक रही अब,
मंच के आभाष को......
सुने हुए खुशियों के पल,
प्रदर्शन के एहसास को..
कल नये आगाज से फिर,
नया सुरज उग आयेगा..
खुशियों की छंटा बिखरेगी,
मुश्किल समय गुजर जायेगा.....
"हे"बम्हपुत्र संगीतज्ञ,
तु अपनी हिम्मत न हार.....
दर्शकों से फिर मिलेगा,
तुझे वहीं पुराना प्यार......

वाचन -आमोद श्रीवास्तव
लेखन-रवि रंगारी
संपादक 
गोविंद साहू (साव)
लोक कला दर्पण
Contact - 9981098720

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