सुरता महतारी के लाल के - स्व. खुमान साव जी



                               सुरता  महतारी के लाल के 

9 जून  2020 को लोक संगीत सम्राट स्व. खुमान साव जी के प्रथम पुण्य तिथि पर विशेष.... 

ऊपर से कठोर और अंदर से नम्र स्वभाव के थे खुमान साव जी 
    जनता के प्रेम को ही सबसे बड़ा पुरस्कार मानते थे 

कोई भी क्षेत्र विशेष की संस्कृति उस क्षेत्र (अंचल) के लोगों की पहचान होती है. उसी में उसकी आत्मा रची बसी होती है. यह जब अभिव्यक्त होकर लोगों के सामने आती है तो लोग भाव विभोर होकर उसका रसपान करने लगते हैं. अपनी संस्कृति का दर्शन कर लोगों को बहुत सुकून मिलता है. 
   ढाई करोड़ की आजादी वाले छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, लोक परंपराएं, लोक पर्वों, लोक नृत्यों, लोक कलाओं एवं लोक गाथाओं की एक विशिष्ट पहचान है. छत्तीसगढ़ की माटी की महक को भारत ही नहीं अपितु विदेशों में बिखेरने वाले कला साधकों में स्व. देवदास बंजारे, स्व. हबीब तनवीर, स्व. झाड़ू राम देवांगन, श्रीमती तीजन बाई, स्व. मदन निषाद, स्व. दाऊ रामचंद्र देशमुख,  स्व. दुलार सिंह साव मंदराजी, लालू राम साहू, स्व. महासिंग चन्द्राकार, स्व. लक्ष्मण मस्तुरिया, केदार यादव, स्व. गोविन्द राम निर्मलकर, पूना राम निषाद, माला बाई, फिदा बाई ऋतु वर्मा, ममता चन्द्राकार, कविता वासनिक, पूनम विराट, दीपक चन्द्राकार, रामाधार साहू, एवं लोक संगीत सम्राट 
स्व. खुमान लाल साव के नाम अग्रणी है. 

जब छत्तीसगढ़वासी फिल्मी संस्कृति की चकाचौंध में अपनी समृद्ध लोक संस्कृति को भूलते जा रहे थे. ऐसी स्थिति में नाचा के भीष्म पितामह स्व. दुलार सिंह साव मंदराजी, लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम के अग्रदूत स्व. रामचंद्र देशमुख, स्व. महा सिंग चन्द्राकार,  केदार यादव, लक्ष्मण मस्तुरिया, स्व. खुमान साव जैसे महामानवों ने हमारी समृद्ध एवं गौरव शाली लोक संस्कृति के संवर्धन एवं संरक्षण में अपने जीवन को समर्पित कर दिया. 
लोक संगीत सम्राट स्व. खुमान साव जी से  प्रथम बार मुलाकात पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित साहित्यिक आयोजन में दिग्विजय
स्टेडियम के सभागार में हुआ था।  वहां वह शोरगुल कर रहे कुछ जवान बच्चों को अपनी कड़क आवाज से डाट रहे थे. यह देखकर अग्रज कवि श्री महेन्द्र कुमार बघेल मधु जी ने मुझसे पूछा कि ये शख्स कौन है. बहुत ही कठोर व्यवहार लगता है. मैंने भी पहचानने में असमर्थता जाहिर की. इसी बीच कार्यक्रम की अगुवाई कर रहे  गुरुवर डॉ. नरेश कुमार वर्मा जी (प्राध्यापक,  हिन्दी, दिग्विजय कॉलेज, राजनांदगांव )हम लोग बैठे थे उस तरफ आए तो मैंने पूछा कि - ऊंचा कद काठी, श्वेत वस्त्र धारण किए एवं रौबदार व्यक्तित्व के धनी यह व्यक्ति कौन है ? तो वर्मा सर जी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा है कि- अरे!  ओम प्रकाश इसे नहीं जानते?  वो सामने खड़ा शख्स कोई व्यक्ति नहीं एक संस्था है. छत्तीसगढ़ लोक संगीत के पुरोधा पुरुष है. अरे भई वे" चंदैनी गोंदा" के संचालक आदरणीय खुमान साव जी है. फिर साव जी से चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिए।
        दूसरी मुलाकात मानस भवन दुर्ग में आयोजित राज्य स्तरीय छत्तीसगढ़ी साहित्य सम्मेलन में हुआ ,कार्यक्रम प्रारंभ नहीं हुआ था. साहित्यकारों  और कलाकारों का आगमन हो रहा था. भवन के स्वागत द्वार में आदरणीय खुमान साव जी और अन्य साहित्यकार खड़े हुए थे. मैंने खुमान सर जी सहित वरिष्ठ साहित्यकारों से आशीर्वाद लिया।
इसी बीच एक युवा साहित्यकार आए और जिन साहित्यकारों को पहचानते थे उनके चरण स्पर्श किए. और हम लोगों से खुमान साव जी तरफ इशारा करते हुए पूछने लगे कि ये कौन है? मैं खुमान सब जी का परिचय देने ही जा रहा था कि साव जी ने मेरे हाथ पकड़ते हुए रोक दिया और उस नौजवान रचनाकार से पूछा कि - पहिली तेहा बता कोन गांव के हरस. नवजवान संगवारी ह बोलिस -मेहा बघेरा (दुरुग) के हरव, खुमान सर जी ह बोलिस -तेहा बघेरा के हरव कहिथस त में कोन हरव तेला तोला जाने ल पड़ही, अऊ मोर नाम नई बता पाबे ते तोला मारहू किहिस, वहू नवजवान ह सकपगागे। 
   फिर इस दौरान  चूंकि खुमान साव जी के  अख्खड़ स्वभाव से मैं परीचित हो चुका था। देरी न करते हुए बताया कि आपके सामने जो महामानव तन कर खड़ा हुआ है वह और कोई नहीं लोक संगीत के के भीष्म पितामह श्री खुमान साव जी है।वह नए रचनाकार कर यह सुन कर गदगद हो गए और श्रद्धा से पांव छुए और कहा कि आज मैं आपके दर्शन पाकर धन्य हो गया। और साव जी ने पुत्रवत भाव से उसके सर पर हाथ रखते हुए उसे आशीर्वाद प्रदान किया। इस बीच चार पांच वरिष्ठ साहित्यकार इस प्रसंग पर मंद मंद मुस्कुराते रहे. 
   फिर खुमान साव जी अत्यन्त विनम्र भाव से कहा कि- तेहा बघेरा के हरो केहेस तेकर सेती तोला केहेंव कि मोला जाने ल पड़ही ।फेर वो नव जवान ल पूछिस कि -दाऊ रामचंद्र देशमुख ल जानथस? वो ह बोलिस हाव. फेर पूछिस विश्वंभर यादव मरहा ल जानथस? त वोहा फेर कहिस कि हाव जानथव।

साव जी बोलिस ओकर घर म रिहर्सल चले त महू ह डेरा डारे रहव.  हारमोनियम बजाव. तेकर सेती तोला केहेंव रे बाबू कि मोला जाने ल पड़ही?
  तो इस घटना से यह पता चलता है कि साव जी उस नारियल की भांति थे जो बाहर से बहुत ही कठोर नजर आते थे परन्तु अंदर से बहुत ही नम्र थे.उनके द्वारा संचालित चन्दैनी गोंदा की प्रस्तुति को देखने का सौभाग्य मुझे भरदाकला (बालोद जिला ) में प्राप्त हुआ था. हमारे गांव सुरगी के बहुत सारे कला प्रेमी भी भरदाकला पहुंच कर विराट सांस्कृतिक प्रस्तुति के दर्शन का पुण्य लाभ उठाए थे। खुमान साव जी के मधुर संगीत से सजे विभिन्न गीतों को जब लोक गायकी में दक्ष गायक- गायिका के कोकिल कंठी आवाज गाते  और उसमें नृत्य की मनोहरी छटा मन को झंकृत कर दिए थे. बारहमासी गीत के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सोंधि सोंधि माटी की महक को बिखेरे वहीं भारत की आजादी की लड़ाई को प्रस्तुत कर लोगों में शहीदों के प्रति श्रद्धा भाव जगाने के साथ ही 
देश प्रेम की अलख जगाए।  पूरी रात भर दर्शक टक बांध कर चन्दैनी गोंदा की प्रस्तुति को देखते रहे.इसी प्रकार वर्ष 2016 में सुरगी के मुख्य सांस्कृतिक मंच  (शनिवार बाजार चौक) में 17 वां वार्षिक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. इसमें 87 वर्षीय खुमान साव जी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2015 हेतु चयन किए जाने पर नागरिक अभिनंदन किया गया।इस महामानव का निधन 9 जून 2019  को हुआ. लोक कला के इस शिल्पी को  उनकी प्रथम पुण्य तिथि विनम्र श्रद्धांजलि है. शत् शत् नमन है. 
   
                       ओम प्रकाश साहू" अंकुर "
    ग्राम +पोष्ट - सुरगी, तह. +जिला - राजनांदगांव (छ. ग.) 
  मो. न.  7974666840

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