कोरोना गीत - ओमप्रकाश साहू 'अंकुर' द्वारा


                                   अपने डहर कमाबो खाबो 
 परदेस ले अपन जनम भूमि कोति आवत हे ।
 कोरोना  हा सब ला अपन माटी मा लावत हे ।।

 गजब झन  पैदल कतको दूरिहा ले   आवत हे ।
 रेंगत -रेंगत ओमन अब्बड़ दुख पावत हे ।।

 धनवान मन हा  जी गजब  मजा उड़ावत हे ।
 गरीब मनखे मन संसो- फिकर मा मर जावत  हे ।।

बस  रेलगाड़ी हा इंकर भाग मा नई हे संगी हो ।
 देखव  गा जानवर  जइसे टरक मा भरावत हे ।।

कुछु नई मिलत हे मजदूर मन ला  सहयोग ।
 लांघन -भूखन  वोमन ला रहे ला पड़ जावत हे ।।

दू बीता के पेट खातिर परदेस मा जाके ।
 अपन करम ला  मरो जियो ले ठठावत हे ।।

आवत खानी  वोमन जऊन  दुख पाहे तेला ।
 सुसक- सुसक  के  सब  ला  बतावत   हे ।।

सबो मन अपन छइहाँ भुइयाँ डहर आवत हे ।
 नई जावन  कभू परदेस कहिके कसम खावत हे।।

 अपन गांव अपन राज मा रहिके कमाबो खाबो ।
 मजदूर मन हा अइसन अब अपन मन ला बनावत हे ।।

                              ओम प्रकाश साहू अंकुर
                                सुरगी, राजनांदगांव

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