कला / साहित्य के अनन्य साधक लोक संगीतकार - आत्माराम कोशा ‘अमात्य’


आज २२ जुलाई बुधवार को जन्मदिवस पर विशेष

राजनांदगांव । कला एवं साहित्य किसी तपस्या से कम नहीं है, वे लोग खुशनसीब होते है जो इस आग में तपकर कुंदन की तरह अपनी चमक बिखेरते है और छोड़ जाते है सुनहरी यादेंजिसे दुनिया कयामत तक याद करती है। इसके लिए यहां एक बात बेहद जरूरी है, कहते है - हस्ती को अपनी जो तेरी, चाहत में मिटा दे, फिर क्यों न अहले दुनिया उसे दिल में जगह दें। इंसान इस दुनिया में इक मुसाफिर की तरह आता है, फिर अपने अच्छे बुरे कर्मो का लेखा जोखा के साथ दुनिया से चला जाता है।



                देखा जाए तो कला एवं साहित्य जैसे गुण प्रत्येक इंसान के भीतर विद्यमान है, ज्यादातर लोग किसी एक ही विषय पर ध्यान केन्द्रित कर उस ऊंचाई को पाने में समर्थ हो जाते है जिसके लिए वह निरंतर प्रयासरत रहे है, लेकिन वे लोग और भी ज्यादा महान होते है जो कला/संगीत एवं साहित्य जैसे विधाओं पर अपनी पकड़ रखते है। फिर धीरे-धीरेे उनकी कृति एक पहचान बनकर सामने आती है। ऐसा ही शख्स है आत्माराम कोशा अमात्य  श्री कोशा जी का जन्म २२ जुलाई १९५७ को लखोली नाका के संभ्रांत नागरिक हीरामन कोशा के यहां हुआ। उन्होंने सर्वेश्वर दास हाई स्कूल में मेट्रिक तक शिक्षा ग्रहण की तथा दिग्विजय महाविद्यालय से साहित्य में एम ए किया। श्री कोशा ने अपना कला जीवन की शुरूआत कम उम्र में कौैरिनभांठा स्थित फिरंतीन माता मंदिर में देवी आदि प्रतिमाओं का निर्माण कर किया। बचपन से चित्रकारी के शौकीन रहे श्री कोशा लोक कला व संगीत की यात्रा छत्तीसगढ़ी लोक रंग शैली नाचाके पुरोधा पुरूष दाऊ दुलार सिंह मंदराजी व उनके सुपुत्र भग्गु दाऊ के साथ प्रारंभ की। उनके साथ उन्होंने लखोली - रवेली नाचा पार्टी से अपनी कला यात्रा की शुरूवात करते हुए अंचल के सुप्रसिद्ध नाचा पार्टी टेड़ेसरा में चर्चित नाटक चोर चरणदास’ (नाचा वर्सन) में व्यंजो वादन कर बैकग्राउण्ड म्युजिक की सिद्धहस्तता: दिखाई। अगले दौर में श्री कोशा सन् १९८२-८३ में सुप्रसिद्ध संगीत निर्देशक खुमान लाल साव के साथ लोक सांस्कृतिक संस्था चंदैनी गोंदासे जुडक़र कई वर्षो तक संागीतिक गतिविधियों में संलग्न रहे। सन १९९१-९२ में वर्तमान विधायक डोंगरगांंव दलेश्वर साहू द्वारा निर्मित छत्तीसगढ़ विडियो फिल्म जिसमें छ.ग. शासन द्वारा प्रथम मंदराजी सम्मान से सम्मनित सुप्रसिद्ध पंडवानी गायक झाड़ूराम देवांगन, मदन निषाद, बसंत चौधरी, महेश ठाकुर, लोक गायिका जयंती यादव व ख्याति लब्ध ढोलक वादक मदन शर्मा आदि सुप्रसिद्ध लोक कलाकारों ने काम किया था, उन्होंने इस फिल्म से लोक गायक महादेव हिरवानी को सर्वप्रथम ब्रेक दिया इस फिल्म में श्री कोशा का संगीत देना खुमान लाल साव को नागवार गुजरा व अनबन होने के उपरांत श्री कोशा ने चंदैनी गोंदा छोडक़र अपनी संपूर्ण ऊर्जा लेखन तथा साहित्यिक क्षेत्र में लगा दी। इस दौरान उनकी अखबारों के लिए  लेख, आलेख, कविता, कहानी, समीक्षा, साक्षात्कार, धर्म, अध्यात्म व लोक पर्व एवं त्यौहारों पर लेखनी सतत रूप से चलती  रही। यही नहीं वे कला, संगीत के क्षेत्र में अपनी साथी कलाकारों और नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से  छत्तीसगढ़ी आडियों कैसेट बनवाकर  दहेज दानव, पिया गे हे परदेश, सुरता के फुलवारी, नवा संदेश व फुंदरा आदि में संगीत निर्देशन किया और काफी लोकप्रियता हासिल की। उस जमाने में लोक संगीत के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिये सडक़ चिरचारी की लोक सांस्कृतिक संस्था नवा संदेश द्वारा उनका अत्मीय सम्मान किया गया। श्री कोशा ने लोक संगीत एवं बैठकी परंपरा को जीवंत रखने के लिए जगवारी नामक सांगीतिक संगठन का गठन किया और विभिन्न स्थानों पर गुनी कलाकारों के साथ सांंगीतिक बैैठके आयोजित की।


लेखन यात्रा - श्री कोशा शहर के जागरूक युवकों द्वारा गठित पत्र लेखक मंच के कई वर्षाे तक अध्यक्ष रहे है । वे डॉ. पुखराज बाफना की अध्यक्षता वाली राजभाषा प्रचार समिति, मंदरा जी लोक कला मंच, (कन्हारपुरी), छत्तीसगढ़ साहित्य परिषद, नवीन फल एवं व्यवस्थापन संघर्ष समिति, शिवनाथ तट रक्षण समिति जय बजरंग हमाल कल्याण संघ आदि विभिन्न संस्था संगठनों से जुड़े रहे। सन २००० में वे छत्तीसगढ़ साहित्य समिति जिला अध्यक्ष के रूप में वे केवल शहर व जिले में ही नहीं छत्तीसगढ़ स्तर पर अपनी साहित्यिक पहचान बनाई। कुशल संगठक के रूप में जाने जाने वाले श्री कोशा के इस कलात्मक व संगीतिक / साहित्यिक अवदान के लिए और दुर्ग भिलाई की साहित्यिक संस्था दीपाक्षार साहित्य समिति द्वारा सन २००५ में स्व. मदन निषाद स्मृति दीपाक्षार सम्मान से सम्मानित किया गया।

                श्री कोशा ने अपने रचनात्मक एवं जागरूकता पूर्ण कार्य के चलते पत्र लेखक मंच से राजीव फैंस के बैनर तले सन् १९९५ में अपने मित्र सतीश भट्टड़ के साथ राष्ट्रीय एकता अखंडता एवं सदभावना का संदेश देने दिल्ली तक१७०० कि.मी. की क्रास हेड मोटर सायकिल यात्रा तय की । दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के अनुबंधित कलाकार एवं कवि/रचनाकार श्री कोशा के गीत संगीत एवं काव्य पाठ का प्रसारण इन केन्द्रों से नियमित होते रहता है। वे राज्य में होने वाले विभिन्न साहित्यिक महोत्सवों एवं कवि सम्मेलनों में शिरकत करते रहते है। इस तरह के आयोजनों में वे कवि दानेश्वर शर्मा, नारायण लाल परमार, लक्ष्मण मस्तुरिया, पवन दीवान, मुकुंद कौशल, डॉ. सुरेन्द्र दुबे, रामेश्वर वैष्णव, संतोष झांंझी, सुशील यदु, विशम्भर यादव, गणेश सोनी, अनिल कांत बख्शी, पदमलोचन शर्मा, ‘मुहफटपीसीलाल यादव कुबेेर साहू आदि के साथ मंच साझा ही नही किये वरन इनमें से कई कवियों की रचनाओं को स्वर बद्ध किया। उन्होंने अपनी लेखनी प्रतिभा के जरिये शासन से कई लोक कलाकारों को आर्थिक सहयोग भी दिलवाया। इनमे से राज्य शासन द्वारा मंदराजी सम्मान प्राप्त स्व. मदन निषाद व गोविंद निर्मलकर सहित लोक कलाकार चतुर सिंह बजरंग आदि के नाम प्रमुख है। श्री कोशा पृथक छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिये जाने के घोर समर्थक है। वे पृथक छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन में सक्रिय योगदान के लिये जेल भी जा चुके है। श्री कोशा की छत्तीसगढ़ी रचनाएं विभिन्न पत्र पत्रिकाओं के अलावा राज्य शासन पत्रिका बिहनिया व उत्तर प्रदेश की पत्रिका रश्मिरथी में भी प्रकाशित हो चुकी है जो काफी महत्वपूर्ण एवं लोक संस्कृति से अनुप्र्रमााणित है। उनके द्वारा पलायन की विभिषिका पर लिखित छत्तीसगढ़ नाटक पलायन के पीरा पर छत्तीसगढ़ के कथा सम्राट डॉ. परदेशी राम वर्मा व सुुप्रसिद्ध पंथी नर्तक देवदास बंजारे के हाथों दिग्विजय कॉलेज में श्रेष्ठ नाटककार के रूप में सम्मानित किया गया। उनके द्वारा भक्तिन माता राजिम पर लिखे नाटक का शहर के कलाकारों द्वारा राजिम महोत्सव में मंचन किया जा चुका है। श्री कोशा जी को उनके कला साहित्य सहित अन्य रचनात्मक योगदान हेतु शहर के समाजसेवी संस्था उदयाचल में मुख्यमंत्री डॉॅ. रमनसिंह के हाथों स्व. नन्दूलाल चोटिया सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा वे वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य पं. शिव कुमार शास्त्री, आचार्य सरोज द्विवेदी तत्कालीन धर्म, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री धनेन्द्र साहू के हाथों सम्मनित व अभिनंदित हो चुके है। श्री कोशा के कुशल संपादन में छ.ग. के लब्ध प्रतिष्ठ कवि, रचनाकारों का कविता रतनावलि - सुरति साहित्य मंच (सुंदरा) के सौजन्य से प्रकाशित हो चुकी है इसके अलावा उन्होंने शहर के कई कवि साहित्यकारों की रचनाओं का संपादन किया है।



         कला एवं साहित्यिक सफर पर एक नजर - छत्तीसगढ़ साहित्य समिति, जिला इकाई राजनांदगांव का अध्यक्ष व पत्र लेखक मंच, के पूर्व अध्यक्ष, रहे श्री कोशा नवीन फल एवं सब्जी बाजार व्यवस्थापन संघर्ष समिति पुरानी मंडी का उपाध्यक्ष, सुरति साहित्य मंच, सुुंदरा राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति, रायपुर-कार्यकारिणी सदस्य, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति राजनांदगांव कार्यकारिणी सदस्य, जगवारी व लोक सांस्कृतिक संस्था चंदैनी गोंदा धरोहर मयारू माटी आदि के संरक्षक व संयोजक है। लिखित कृतियां - छत्तीसगढ़ राज्य शासन केे सांस्कृतिक विभाग की त्रैमासिक पत्रिका बिहनिया, बिहार की पत्रिका रश्मिरथी, सर्वहारा पत्रिका रायपुर विचारक विथी साकेत छत्तीसा, रतनांजलि, काव्य संग्रह के अलावा दैनिक भास्कर, हरिभूमि नवभारत, रौद्रमुखी, सबेरा संकेत, नांदगांव टाईम्स, दैैनिक दावा, छत्तीसगढ़ झलक, कृषक युग आदि विभिन्न पत्रिकाओं में लेख, शोध, आलेख, गीत, गजल, कविता, नाटक, कहानी-कंथली आदि प्रकाशित हो चुके है। श्री कोशा के आकाशवाणी रायपुर, दूरदर्शन से काव्य रचना एवं छत्तीसगढ़ी गीतों का प्रसारण समय -समय पर होते रहता है।     पिछले दिनों अंचल की लोक सांस्कृतिक संस्था मयारू- माटी के बैनर तले प्रस्तुत की गई छत्तीसगढ़ी गीतों की श्रृंंखला ने यू टूयुब और गुगल में काफी धूम मचाया व श्री कोशा द्वारा संगीतबद्ध गीतों को काफी लोकप्रियता मिली।


साहित्य के क्षेेत्र में - सम्मान एवं उपलब्धियां - दीपाक्षर सम्मान, स्व मदन निषाद की स्मृति में, दीपाक्षर साहित्य समिति दुर्ग, भिलाई द्वारा लोक कला संगीत एवं साहित्य के क्षेेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उदयाचल एवार्ड स्व. नंदूूलाल चोटिया स्मृति में, साकेत सम्मान संत कवि पवन दीवान के हाथों सांकेत साहित्य परिषद सुरगी द्वारा, लोक कला एवं साहित्य के क्षेेत्र में विशेष योगदान के लिए लायंस क्लब द्वारा कलमकार साहित्य सम्मान, छत्तीसगढ़ी साहित्य सम्मान, सुप्रसिद्ध कथाकार डॉ. परदेशी राम वर्मा के हाथों छत्तीसगढ़ नाटय लेखन के लिए छत्तीसगढ़ साहित्य परिषद द्वारा, सुुरति साहित्य सम्मान श्रेष्ठ संपादन के लिए छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह रतनांजलि, माननीय लीलाराम भोजवानी के द्वारा, पत्र लेखक सम्मान श्रेष्ठ पत्र लेखन एवं दीर्घकाल तक साहित्यिक सक्रियता हेतु पं. शिव कुमार शास्त्री एवं वरिष्ठ पत्रकार शरद कोठारी के हाथों तथा तत्कालीन प्रतिपक्ष के उपनेता व वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा श्री कोशा के साहित्यिक अवदान हेतु भिलाई में आगाशदीया सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके अलावा समता साहित्य अलंकरण सम्मान २०११ दलित साहित्य अकादमी धमतरी द्वारा साहित्यिक एवं समाज सेवा के क्षेत्र में श्री कोशा को दिया गया। गत दिनों श्री कोशा को ग्राम मोखला मेें लोक संगीत के क्षेत्र में श्रेष्ठ योगदान के लिये लोक सांस्कृतिक संस्था द्वारा लोक धून सम्मान से सम्मानित किया गया।


अन्य विशेषताएं - छत्तीसगढ़ी लोक कलाधर्मी, लोक कलाकार, वादन पक्ष, लोक सांस्कृतिक दल मंदराजी दाऊ के साथ लखोली - रवेली नाचा पार्टी राजनांदगांव, चोर-चरण दास स्वर्ण कला मंडली टेड़ेसरा लालू - मदन नाचा पार्टी राजनांदगांव - डोंगरगांव के अलावा लोक सांस्कृतिक संस्था चंदैनी गोंदा, छत्तीसगढ़ी फिल्म दहेज दानव का संगीत निर्देशन व छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्माता विवेक सार्वा द्वारा मंदराजी दाऊ पर बनी बायोपिक फिल्म के वे गीतकार के रूप में चर्चित रहें। श्री कोशा छत्तीसगढ़ के साहित्य की प्रतिष्ठा एवं छत्तीसगढ़ को राज भाषा का दर्जा मिले इस उद्देश्य से पिछले कई वर्षो तक छत्तीसगढ़ में मासिक समाचार पत्र जगवारी निकालते रहे । वर्तमान में वे अंचल की लोकप्रिय समाचार दैनिक दावा व लोक कला संगीत व साहित्य की  बहुरंगी सप्ताहिक समाचार पत्र लोक कला दर्पण सेे जुड़ेे हुए है इस तरह अनेकों सम्मान से विभूषित व उपलब्धियों को अपने आप में समेटे लोककला साहित्य एवं संगीतधर्मी आत्माराम कोशा ‘‘अमात्य’’ की अविस्मरणीय कला यात्रा बेमिसाल है आज उनके ६३ वें जन्मदिन पर उन्हें कोटिष: बधाई एवं शुभकामनाएं है।


सूफी बी एस चौहान

तुलसीपुर राजनांदगांव

मो. ८८१७१७४५९१

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