*गाँव मा साँझकुन*


गाँव मा सांझकुन
गोड़रिया के चहकइ
सुरुज के ललियइ
तरिया के सुघरइ
कौंव्वा के चिचियइ
गाय-गरु के रेंगइ
राउत के हरखइ
बबा के ढेरा अंटइ
ददरिया के झड़कइ
चहा के पियइ
बोहासिन के रेंगइ
पनिहारिन के गोठियइ
दिया-बाती के करइ
मंदिर मा घंटी बजइ
छेना-आगी के धुंगियइ
लइका के सेंकइ
केंहे-केंहे रोवइ
लइकन के खेलइ
गाय-भइंसी के दूहइ
दूध के चूरइ
बिलई के नरियइ
मुसवा के भगइ
कुकुर के भुंकइ
भंइसा के पगुरइ
कोलिहा के नरियइ
कहिनी के कहइ
बरतन के घनघनइ
गुड़ी के बैठकइ
बबा के कँखइ
डोकरी के जम्हइ
काकी के बड़बड़इ

*अउ कतेक लमइ*
*अब्बड़ हे गोठीयइ*......

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रचना:- धनराज साहू बागबाहरा 🙏
सादर समीक्षार्थ...

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