अपनी कला से हमारे बीच रहेंगे भैयालाल हेड़ाऊ


सख्शियत



प्रतिभावान कलाकारों में होती थी गिनती
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छत्तीसगढ़ अंचल के अनेक कलाकारों ने राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ी और हिन्दी दोनों क्षेत्रों में अपनी कला प्रदर्शन के माध्यम से खूब नाम कमाया है। इस तरह की परंपरा कई दशकों से चली आ रही है। यह सिलसिला कई दशकों से छत्तीसगढ़ अंचल में देखने को मिल रही है। अंचल के राजनांदगांव जिले को कलाकारों का गढ़ माना जाता रहा है। इसी राजनांदगांव जिले के ख्याति लब्ध कलाकारों में भैयालाल हेड़ाऊ भी थे, जिन्होंने आंचलिक लोककला को ऊंचाई प्रदान करने में कोई कमी नहीं की। आपने अपनी कला की शुरूआत राजनांदगांव जिले से ही की। आपने अपनी कला के दौरान अनेक लोक कला संस्थाओं के साथ ही कई मनोरंजक आर्केष्टा टीमों में अपनी योगदान दिए। स्वभाव से सदैव विनम्र व हंसमुख रहे। अंतिम अस्वस्था के कुछ पल को ही छोड़कर सदा कला जगत में ही लीन दिखाई दिए। इतना ही कलाकारों को कला की बारीकियों से अवगत भी कराते रहते थे। आप कलाकारों के चहेते रहे। सामान्य दिनचर्या में भीभी उदासीनता का भाव आपमें कभी नहीं दिखा, जबकि आपके चार पुत्रों में दो का निधन होने के साथ पत्नी भी इस दुनिया में आपका साथ छोड़ चुकी थी।
                  
इस कलाकार का घरेलू वातावरण कला मय रहा, जिसमें आपके पिता वासुदेव हेड़ाऊ एक अच्छे कलाकार रहे। आप इसी कारण बचपन से ही गायन क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को निखारने में लगे रहे। आपने 1971 में छत्तीसगढ़ी लोकमंच चंदैनी गोंदा के साथ जुड़कर अनेक गीतों की सुमधुर प्रस्तुति दी।  इसके बाद सोनहा बिहान, नवा बिहान और अनुराग धारा के साथ अनेक सांस्कृतिक मंडलियों और मंचों में गायन व अभिनय करते रहे। आपने हम तोरे संगवारी कबीरा रे...मन डोले रे माघ फगुनवा....चल शहर जाबो रे संगी...धन धन रे मोरे किसान...जैसे अनेक कालजयी गीतों को स्वर दिए। इसी तरह हिन्दी गानों में हेमन्त कुमार के गानों को आर्केष्ट्रा के माध्यम से गायन करते थे। आपके जमाने में राजनांदगांव के मशहूर आर्केस्ट्रा राज भारती से जुड़कर आप वर्षो तक गायन करते रहे। इसी तरह राजनांदगांव के शारदा संगीत समिति और मिलन संगीत समिति में भी अपनी गायन करते रहे। आकाशवाणी के माध्यमों से आज भी आपके गायन की प्रस्तुति होते रहती है। आप हेमन्त कुमार के गानों की जीवंत प्रस्तुति देते थे। इसी तरह लोक मंचों में आप नाटकों की प्रस्तुति भी देते थे। आकाशवाणी और दूरदर्शन में अनेक लोकनाट्यों के कमाल के ड्रामा आर्टिस्ट थे।

भैयालालजी सन 2003 में छत्तीसगढ़ी फिल्म तुलसी चौरामें बखूबी अभिनय किया है। तुलसी चौरा के इस पारिवारिक फिल्म में आपने हीरो के पिता की भूमिका अदा किए हैं। इसी तरह छत्तीसगढ़ की प्रथम बायोपिक छत्तीसगढ़ी फिल्म दाऊ मंदराजी में भी आपने काम किया है। संयोग से दाऊ मंदराजी भी राजनांदगांव के ही जाने माने नाचा कलाकार रहे हैं। आप इस फिल्म में काम कर अपने को सौभाग्य मानते थे। आप छत्तीसगढ़ी फिल्म टुरा रिक्शा वाला और बंटवारा में भी काम किए।

इसी क्रम में सन 1981 में आपने जाने माने निर्देशक सत्यजीत रे की टेलीफिल्म सदगति में अभिनय किए। आपके इस फिल्म में अभिनय को काफी सराहना मिली और मुंबई में काम करने का अवसर भी आपके पास आया, फिर भी आपने आंचलिक लोक को ज्यादा महत्व दिए। आपके साथ इस फिल्म में छत्तीसगढ़ के अन्य कलाकारों को काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म की शूटिंग भी अंचल में हुई थी। इस फिल्म में बालीवुड की जानीमानी हस्तियों में ओमपुरी और स्मिता पाटिल जैसे कलाकार सम्मिलित थे। आदिवासियों पर फिल्माई गई इस फिल्म को काफी ऊंचाई मिली। मुंशी प्रेमचंद की कृति पर इसे फिल्माई गई थी।

अंचल के इस लोक कलाकार भैयालाल हेड़ाऊ का 87 वर्ष की उम्र में कुछ दिनों पूर्व राजनांदगांव में निधन हो गया। आपकी कला को चिर स्मृति बनाए रखने के लिए अनेक सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा अनेक बार आप सम्मानित हुए। संपूर्ण कला जगत इनके निधन का शोक समाचार सुनकर स्तब्ध रह गए। यह कलाकार अपने चहेते कलाकारों को अदृश्य रूप में सदैव मार्गदर्शन करते रहेंगे।



डॉ. दीनदयाल साहू
भिलाई नगर


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1 टिप्पणियां

  1. भईया लाल हेड़ाऊ जी ल मोला आकाशवाणी रइपुर के मोर भुइयां कार्यक्रम म सुने के मउका मिले रिहिस।
    तब ओमन बताय रिहिस की दाऊ रामचन्द्र देशमुख जी ह ओमनल ल खोजत बीटीआई डोंगरगांव तक आय रिहिस, अऊ श्री हेड़ाऊ जी ल ओमपुरी, स्मिता पाटिल के संग काम करे के अवसर मिले रिहिस।
    मोला लगिस की ये बात ल शेयर करना चाहिए अतका बड़का कलाकार के बारे म कुछ भी लिख पाना हमर बर असम्भव से लगथे।
    प्रणाम सम्पादक मंडल ल
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