जिनगी म कहीं नईहे


आंखी के देखा ह सहीं नइहे
खोज के देख जिनगी म कहीं नइहे
अंधियारी म अंजोरी बगराबे घलोक 
आये हस दुनिया म त छोड़ जाबे घलोक

सकेल डार सोना-चांदी,जमीन जायदाद
लखपति करोड़पति बन जा आबाद
फेर करनी के करजा चुकाबे घलोक
आये हस दुनिया म छोड़ जाबे घलोक

चार दिन के जिनगी हे चार दिन के मेला
चार झन के बीच रहिके पाले हस झमेला
चार गंगा म नहाले तैं धोवाबे घलोक
आये हस दुनिया म छोड़ जाबे घलोक

एके रद्दा रेंग संग दीही तोर धरम ह
रहि जही अमर तोर नाव करम ह
इही भुइंया म अमर होई जाबे घलोक
आये हस दुनिया म छोड़ जाबे घलोक

ग्वाला प्रसाद यादव
संवादाता लोक कला दर्पण छुरिया
जोशी लमती गैंदाटोला तहसील छुरिया जिला राजनांदगांव छग

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