कविता - सावन आया




पावन मास सावन आया
संग उल्लास अपने लाया ।
है गगन नगाड़ा बजा रहा
पवन बावरा हुआ जा रहा ।
धरती ओढ़ी धानी चूनर
मेघ कर रहे नृत्य घूमर ।
झरझर बरसे देखो पानी
देवराज भी बना है दानी ।
कृषकों का मन हुआ प्रफुल्लित
खेती कर रहे होकर हर्षित ।
नदी, झरने, ताल,सरोवर
सबका यौवन गया निखर ।
नख शिख तक कर के श्रृंगार
जाती बाला शिव के द्वार ।
गूँजे घंटा हर शिवालय
चढ़े विल्वपत्र,पुष्प और पय ।
मनोरथ वे पूरी कर पाते
जो भी शिव के द्वारे आते ।
" नीरव" भी आया शिव के द्वार
कर लो भगवन नमन स्वीकार ।
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नंदकिशोर साव "नीरव"
लखोली, राजनांदगांव

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