महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक जड़ीबूटियां एवं उनके फायदे

मैं तुलसी तेरे आँगन की 
कुष्ठ रोग-पत्तों को 10 -20 ग्राम स्वरस प्रतिदिन प्रातः काल पीने से लाभ.
2-तुलसी के पत्तों को नींबू का रस में पीसकर दाद वात रक्त कुष्ठ आदि पर लेप करने से लाभ।
3-शक्ति वृद्धि के लिए-20 ग्राम तुलसी बीज चूर्ण, 40 ग्राम मिश्री मिलाकर, पिस ले 1 ग्राम की मात्रा में, शीत ऋतु में कुछ दिन सेवन करें, वात कफ से बचाव होता है।
4-तुलसी के 5 पत्ते प्रतिदिन पानी के साथ निगलने से, बुद्धि मस्तिष्क की शक्ति बढ़ती है।
5-तुलसी का तेल नाक में टपका ने से पुराना सिर दर्द दूर होता है।
6-तुलसी के तेल सिर में लगाने से जुड़े एवं लिख मर जाती है।
7-तेल को मुंह में मलने से चेहरा साफ होता है।
8-दंतशूल- तुलसी काली मिर्च और तुलसी के पत्तों की गोली बनाकर दांत के नीचे रखने से दांत दर्द दूर होता है।
9-कंठ रोगों में लाभ-तुलसी के पत्ते इलायची अदरक का रस सेवन करने से वमन जी मिचलाना में लाभ।
10-न्यूमोनिया-काली तुलसी के पत्तों 10 ग्राम रस में गाय का घी गुनगुना कर दुगुना रस   में   चटाने से आराम मिलता है।
कर्णशूल-पत्तों का रस गर्म करके, दो बूंद कान में डालें, मलेरिया झाई वह घांव में भरने के लिए तुलसी का रस महत्वपूर्ण है।
जय तुलसी महारानी, सदा सहाय।। 

✍️ सीमा साहू जिला प्रतिनिधि दुर्ग (लोक कला दर्पण)
सांस्कृतिक विरासत का संवाहक🙏🥢🐚⭐ 
                  
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पौधा का नाम- चिरायता
कलर हरा रंग
पौधा का अंग
फल फूल तना  के बारे में जानकारी  
यह ७०से१२५ सेमी ऊंचा सीधा एक साल तक जीवित रहने वाला होता है इसके पौधे में अनेक शाखाएं होती है
तना ‌
इसके तने नारंगी श्यामले रंग के होते हैं इसके पत्ते सीधे ५_१० सेमी लम्बे नीचे के पते बड़े ऊपर के पते कुछ नोक दार  होते हैं
फूल
इसके फूल अनेक होते अत्यधिक छोटे हरे पीले रंग के होते है


फल 
इसके फल ६ मिली मीटर व्यास के अंडाकार नुकीले होते है। चिरायता के पौधे में फूल और फल आने का समय अगस्त से नवम्बर तक होता है

। चिरायता बुखार के लिए रामबाण दवा है
काढ़ा
चिरायता तथा धनिया के हरे पत्ते से काढ़ा बना ले इसे (१०_२०) मीली लीटर की मात्रा में पीने से बुखार में शीघ्र लाभ होता है

चिरायता २_४ ग्राम चूर्ण में मधु मिलाकर खाने से सभी प्रकार का बुखार ठीक होता है
   २
 
आंखों के रोग में चिरायता फायदेमंद  चिरायता के फल गे पिप्पली पेस्ट और सौवीराज्न मिलाकर रख लें फिर एक सप्ताह बाद मातुलुग के रस में इसे पीस ले इसे रोजाना काजल की तरह लगाने से आंखों की बिमारी में लाभ होता है

बराबर बराबर मात्रा में चिरायता सोंठ तथा गुडूची के १५_२० मिली लीटर काढ़े का सेवन करने से भी मां ताओं के श्तन की गुणवत्ता बढ़ता है

चिरायता के सेवन से  खां सी मे फायदा
काढ़ा २०_३० मिली लीटर की मात्रा में पिये इससे  खांसी में लाभ होता है इससे आंत के कीड़े मरते  खत्म होते हैं

पिलीया और एनीमिया रोग में लाभ
विधि
चिरायता कुटकी गिलोय नीम की छाल का काढ़ा बना लें 
मात्रा १५_२० मिली लीटर काढ़ा में मधु डाल कर पिलाने से कामरा तथा पाण्डु रोग में लाभ होता है
खूनी बवासीर में चिरायता का इलाज।
मात्रा बराबर बराबर में दारूहल्दी चिरायता नागमोथा तथा धमास के चूर्ण (२_४/ 
ग्राम का सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
चिरायता से चर्म रोग में फायदा।
मात्रा बराबर बराबर चिरायता लोध चन्दन  सोंठ कमल  केसर का चूर्ण बना लें इसे २० ग्राम की मात्रा में लें और २००  मिली लीटर जल पका लें जब काढ़ा एक चौथाई बच जाए तो इसे (५_१०) मिली लीटर मात्रा में पीने से चर्म रोग या त्वचा रोग में लाभ होता है
नाम
गुणेश्वरी गंजीर
कसारीडीह दुर्ग छत्तीसगढ़

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*जामुन के गुण*-
                 *औषधि के रूप में*-
*1•शक्कर (मधुमेह)बीमारी -पके जामुन को सुखाकर ,बारीक  कूट पिसकर चूर्ण बनाकर सुबह-शाम 1-1चम्मच खाने से शुगर कन्ट्रोल रहता है*। 
*2•प्रदर रोग(सफेद पानी)-जामुन के वृक्ष की छाल को काढ़े में डालकर शहद मिलाकर दिन में दो बार खाने से स्त्रियों को ये रोग ठीक हो जाता है*। 
*3•मुंहासे-जामुन के बीज को पानी में घिसकर मुंह पर लगाने से मुंहासे मिटते है*। 
*4•आवाज़ बैठना-जामुन की गुठलियों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियां बना ले ,2-2 गोलियां* *रोजाना दिन में 4 बार चूसे तो इससे बैठा गला खुल जाता है*। 
*अधिक बोलने -गाने वालों के लिए बहुत ही चमत्कारी औषधि है*। 
*5•सपना दोष-जामुन की गुठली का4-5 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ लेने से स्वपनदोष ठीक हो जाता है*। 
*6• दस्त -जामुन के पेड़ की पतियाँ (न ज्यादा पकी हुई न ज्यादा मुलायम) लेकर पीस ले,इसमें थोड़ा सा  सेंधा नमक मिलाकर* *गोलियां बना ले, 1-1 गोली रोजाना सुबह-शाम पानी के साथ लेने से तेज दस्त बंद हो जाते है*। 
*सावधानी-*जामुन हमेशा खाने के बाद खाना चाहिए*। 
*जामुन खाने के तुरंत बाद दूध नहीं पीना चाहिए*। 
*वात रोग वाले को जामुन का सेवन नहीं करना चाहिए*। 
*सूजन,उल्टी, पहीली गर्भावस्था, उपवास में भी जामुन का सेवन नहीं करना चाहिए*। 
*जामुन पर नमक लगाकर खाना चाहिए*। 
*जामुन के गुण-जामुन बर्षा ऋतु में अनेक  उदर रोगों में उपयोगी है , पीलिया,पथरी, अतिसार, पेचिश,संग्रहणी, यकृत,आयरन,शुगर, पाचक,खून शुद्ध करने आदि के लिए बहुत ही चमत्कारी औषधि है*। 

*श्रीमती हेमा साहू/पति खिलेश्वर साहू* 
*कान्ट्रेक्टर कालोनी सुपेला भिलाई* 
*मोबाइल* *नंबर-9993683169*
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गिलोय का पौधा नीम के पेड़ में लगाने से लाभ

पौधा का नाम -  गिलोय 

इसके गुण -  गिलोय बुखार के लिए रामबाण औषधि है। यह इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में भी काम करता है। इसलिए इसके आयुर्वेदिक गुण के लिए इसे जीवंतिका भी कहा जाता है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल कई बीमारियों के लिए किया जाता है बरसात के मौसम में होने वाली वायरस बीमारियों मलेरिया ,डेंगू और चिकनगुनिया में गिलोय का सेवन किया जाता है ।मच्छर से होने वाली बीमारियों में यह काफी फायदेमंद है डेंगू में गिलोय का सेवन प्लेटलेट्स कम होने पर किया जाता है। जिससे प्लेटलेट्स बढ़ाने में काफी फायदेमंद होता है। इसके अलावा गठिया रोग के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं यह डायबिटीज मरीज को ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है ।ज्वारे के रस और गिलोय ,एलोवेरा, करेला के जूस मिक्स करके कैंसर के मरीज को पिलाने से काफी हद तक आराम मिलता है।
इस प्रकार गिलोय बहुत सारी बीमारियों का खात्मा करता है यह प्रकृति का एक सुंदर उपहार है जो हम सब के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी है।🍀🌴🍃🌺

*** धन्यवाद ***
श्रीमती दानेश्वरी साहू हुडको भिलाई नगर (छत्तीसगढ़)
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ये सदाबहार फूल एक आयुर्वेद पौधा है
इसे नयनतारा संधपुष्पा और बरामासी फूल भी कहते हैं 
ये फूल पांच पंखुड़ी वाला होता है 
भारत में मुख्यतः दो प्रकार के पाए जाते हैं 
सफेद रंग के और गुलाबी रंग के 
वैज्ञानिक ने कई सारी तकनीक विकसित कर ली हैं जो अलग-अलग कलर्स के पौधे तैयार किए जाते हैं लेकिन उसके कोई फायदे नहीं है मुख्य रूप से दो ही फूल को औषधि के रूप में बताया गया है
सदाबहर फूल और पत्तों के गुणधर्म 
१- डायबिटीज बवासीर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से भी इसके उपयोग से काफी ज्यादा लाभ मिलता है
२- बालों को काला करने के लिए आप इसके पत्तों को पीसकर लगभग 2 चम्मच रस निकालकर उस रस को बालों पर लगाने से बाल काला होता है
३- चेहरे के दाग धब्बे में इसके फूल को पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा बिल्कुल ठीक हो जाते हैं। 
४- कोई ढंग वाले कीड़े जैसे मधुमक्खी बिच्छू आदि डंक मारते हैं तो उस डंक वाले स्थान पर इसके पत्तों का लेप लगाने से काफी राहत मिलती है 
इस प्रकार सदाबहार पौधे का अनेक गुण धर्म है इसके पत्तों को बी पी कंट्रोल करने के लिए औषधि के रूप में लिया जाता है 

उषा साहू 
कोहका भिलाई 
जय छत्तीसगढ़ जय भारत
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बंगला पान के फायदे :-
 1.   पान खाने से खाना आसानी  से पच  जाता है, जिन लोगो को कब्ज की शिकायत  होती है,  उनको पान खाना लाभदायक  होता है। 
2. अगर आपके मुँह मे छाले हो गए हैं, तो पान चबाइए  छाले दूर हो जायेंगे। 
3. पान के सेवन से सर दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है।  पान में एनाल्जेसिक तत्व पाया जाता है जो दर्द को कम करता है। 
4. सर्दी जुकाम दूर करने में पान बहुत सहायक है। खांसी होने पर शहद के साथ सेवन करें। 
5. पान खून को भी साफ करता है,  इसमें एंटीआक्सीडेंट तत्व मौजूद होते हैँ,  जो त्वचा में निखार लाने में  सहायक होता है। 
6. किडनी यानि गुर्दो से सम्बंधित बीमारी को दूर करने में पान  खाना बहुत लाभदायक है । इसके सेवन से किडनी की काम करने की क्षमता बढ़ती है। 
                   श्रीमती आरती साहू
                   (व्याख्याता)
                    सेक्टर 5, भिलाई 


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ये नागरमोथा के पौधा अउ जड़ आय।हमर छत्तीसगढ़ मा ये बन(खरपतवार)असन जगा-जगा मिल जाथे।
एला सबो बीमारी के एके ठन दवा के रूप मा जाने जाथे🙏🏻

निशा साहू बोरसी

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