नृत्य कला एक साधना हैं-पप्पू साहू



दुर्गम वनांचल कि हरियाली के साथ मांदर की थाप पर अभिगुंजित वातावरण मानपुर, मोहला और अम्बागढ़ चौकी क्षेत्र में देखा जा सकता है।वनों की हरियाली के बीच आज तीज त्यौहारो के अवसर पर खुशियों के साथ मनोरंजक नृत्य का प्रदर्शन होता हैं।इन्हीं खुशियों से हर्षित आज भी यह आदीवासी सरकार की विभिन्न सुविधाओं से वंचित है।ऐसे ही वनांचल सांस्कृतिक क्षेत्र में एक चर्चित नाम हैं पप्पू साहू का,जो मूल रूप से नर्तक व हास्य कलाकार हैं।


जन्म स्थल व सांस्कृतिक परिचय.....

4 दिसंबर सन् 1989 को अम्बागढ़ चौकी में जन्मे पप्पू साहू की सांगितीक व सांस्कृतिक यात्रा बाल्यकाल से ही प्रारंभ हो गई थी।आदीवासी युवक-युवतियों को मांदर कि थाप थिरकते देख इनके नन्हे पाँव भी उत्साह के साथ आकर्षित होकर थिरकने लगते थे।पप्पू साहू ने अनगिनत मंचो मे अपनी सेवाएं दी हैं।साथ ही लोकविधा को मुखरित करने के उद्देश्य को लेकर इन्होंने अपने अनगिनत विधार्थियों को लोकविधा की शिक्षा प्रदान की हैं।स्थानीय स्कूली कार्यक्रमों में पप्पू साहू का नृत्य विधा के तहत महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं।इनके नृत्य निर्देशन में अनगिनत बार प्रशिक्षित शालाओं ने अव्वल स्थान प्राप्त किया है।

कला-यात्रा

पप्पू साहू बचपन से ही हूनरमंद और प्रतिभाशाली रहें है।शासन प्रशासन द्वारा आयोजित विभिन्न शासकीय आयोजनों में इन्होंने ने बढ चढकर हिस्सा लिया और जनमानस तक प्रचारित, प्रसारित किया।एक कुशल नेतृत्व क्षमता के साथ पप्पू साहू शानदार नर्तक और नृत्य निर्देशक हैं।वहीं इनकी हास्य विधा के गूर लोगों को हँसते और गुदगुदाते हैं।विगत कई वर्षो से लोकविधा के तहत लोकयात्रा में अनगिनत मंचो पर इन्होंने अपना जौहर दिखाया है।वर्तमान में पप्पू साहू श्रीमती कविता वासनिक कृत "अनुराग धारा" लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम राजनांदगाँव से विगत 15 वर्षो से सहभागी कलाकार के रूप में अपनी सेवा प्रदान कर रहे है।लोककला परिवार इनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है।

       रवि रंगारी
     ( ब्यूरो चीफ)
    लोककला दर्पण
      राजनांदगांव
  मो.9302675768

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1 टिप्पणियां

  1. जब खुद के आंखी अऊ कान देखे
    -सुने के लाईक नई रहय पप्पु तब सरकार हा गर मा माल अऊ कापत चोला मा शाल ओढ़ा के सम्मान करथे । अब कलाकार उपजे नहीं, कलाकार के रोपा रोपे जाथे । ्य्आ्य््य्आ्य्य्आ्य््य््््य्आ्य्

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