छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के पुरोधा स्व.खुमान साव जी के जन्मदिन पर सादर नमन

स्मृति शेष.......


छत्तीसगढ़ की माटी कि महिमा अनंत और विशाल हैं।इस माटी इतिहास पर नजर डाले तो संस्कार, संस्कृति और सभ्यता का दिव्य प्रकाश इ, माटी की पहचान है।कहाँ जाता हैं कि इस माटी ने अनगिनत गाथाएँ लिखी,कई वीर पुरूषों को जन्मा हैं,और साहित्यिक सांस्कृतिक कृतियों के सृजक इसकी आत्मा है।

आज हम उस व्यक्तितत्व की बात कर रहे जिन्होंने लोक संगीत, शास्त्रीय संगीत, और सुगम संगीत से छत्तीसगढ़ माटी को नई पहचान दी।संस्कारधानी राजनांदगांव जिले के डोगरगाँव स्थित ग्राम-खुर्सीटिकुल में सदी और संगीत के युगदृष्टा, संगीत साधक,लोक संगीत के भीष्म पितामह स्वनामधन्य संगीतकार स्वं खुमान लाल जी साव का जन्म ऐसे दिन हुआ जिस सारे विधार्थी अपने गुरु को नमन वंदन करते हैं।इस दिन को भारत मे शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।इसी दिन 5 सितंबर 1929 को स्वं खुमान लाल जी साव ने इस माटी में अवतरण किया था।
छत्तीसगढ़ लोक संगीत के पुरोधा स्वं खुमान साव का संगीतिक लगाव बचपन से ही था,युवावस्था के पहुंचते पहुंचेते इनको नाचा के युग पुरुष दाऊ मंदरा जी सानिध्य प्राप्त हुआ।


लगभग 70 के दशक में इनकी मुलाकात दाऊ रामचंद्र देशमुख से हुई जो बेहद संगीत प्रेमी थे।स्वं खुमान साव जी कि ललक को देखकर उन्होंने ने छत्तीसगढ़ की माटी की सौंधी महक के रूप में चंदैनी-गोंदा लोक सांस्कृतिक मंच का गठन किया, जिसमे बतौर संगीत निर्देशक खुमान लाल जी साव थे। कुछ वर्षों पश्चात खुमान लाल सावजी ने इस संस्था की बागडोर स्वयं संम्हाल ली, छत्तीसगढ़ के जन जन तक इस संस्था के उद्देश्य और सांस्कृतिक क्रांति में यह चंदैनी गोंदा कारगर सिद्ध हुई।

अंतिम बात.......

आज खुमान सर हमारे बीच नही है।लेकिन उनकी स्मृतियाँ शेष हमेशा हमारे इर्द गिर्द होने का एहसास कराती है।मै बेहद सौभाग्यशाली हूँ कि खुमान सर के साथ मैने माँ बम्लेश्वरी फिल्म का वाद्य संयोजन किया था।सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक सूरज काँन्वेट में शिक्षकीय कार्य पश्चात सर के घर 3 बजे से लगातार वो और मै संगीतबद्धता और वाद्य संयोजन में रम जाते थे।रात्रि 9 बजे यह यात्रा समाप्त होती थी।और यह यात्रा धीरे-धीरे मुम्बई के सन्नी स्टूडियो में समाप्त हुई।लेकिन खुमान सर के साथ लगभग मैने करीब 5 वर्षो तक मैने चंदैनी गोंदा में अपनी सेवा दी।वाद्य संयोजन किया जो खज पर्यन्त मंचो पर सुनाई देते है।खुमान सर स्नेह और मार्गदर्शन ने मुझ जैसे लापरवाह व्यक्ति को कलाकार बना दिया।आज मै कलाकारी कि जो रोटी खा रहा हूँ वह खुमान सर कि नाम की है।आज उनके जन्मदिन के अवसर पर उन्हें नमन,वंदन और सादर श्रद्धांजलि......
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रवि रंगारी की कलम से.
  (ब्यूरो चीफ)
 लोककला दर्पण
     राजनांदगांव
मो. 9302675768

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