लोककला यात्रा किसी कुंभ से कम नही-जितेन्द्र साहू......



छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के थाना -गुरुर के अंतर्गत ग्राम-चितौड़ में 13 सितंबर सन् 1978 में जन्मे जितेन्द्र साहू लोककला में तबला संगतकार के रूप में एक जाना पहचाना नाम है।माता स्वं इंदरबती साहू एवं पिता स्वं निर्मल कुमार साहू के घर जन्मे जितेन्द्र साहू कि प्रथम गुरु उनकी माता जी हैं।वहीं पुरी ईमानदारी के साथ इनकी सांगितीक यात्रा में इन्हें इनकी पत्नी श्रीमती जानकी साहू के अलावा इनके पुत्र व पुत्री का सहयोग परस्पर मिलता रहता हैं।


शैक्षणिक योग्यता में दखल.......

जितेंद्र साहू ने कक्षा बारहवीं कामर्स विषय लेकर सफलता प्राप्त की साथ ही तबले पर लोक संगीत डिप्लोमा,बी.ए आनर्स.शास्त्रीय संगीत में गायन,तबला तथा एम.ए लोकसंगीत तक कि शिक्षा ग्रहण की है।वहीं ढोलक,तबला, टिमकी, माँदर,दफडा इत्यादि वाधयंत्रो में पारंगत हैं,साथ ही गीत लेखन व संगीत संयोजन में भी इनकी दखल हैं।

पथ-प्रदर्शक गुरु.....

लोकवादक जितेंद्र साहू अपना प्रथम गुरु अपनी माँ को मानते हैं।वहीं गुरूओं कि श्रृंखला में स्वं घनश्याम साहू, श्री तिलक ठाकुर, श्री प्रीतम रजक,स्वं खुमान साव जी,श्री विरेन्द्र साहू, श्री दुष्यंत हरमुख, पदम् श्री ममता चन्द्राकर, श्री प्रेम चन्द्राकर, श्री भूपेन्द्र साहू, सोनी सर,श्री बिहारी तारम् के साथ साथ त्रिलोक सिन्हा को अपना सखा गुरु मानते हैं।

सांगितीक क्षेत्र में उपलब्धि......

अब तक साहू ने आडियो विडिओ "जा रे दीवाना,भक्तिन दाई कर्मा,कर्मा के ताल में झूमें जा, झन जा रे गाड़ी वाला जैसे लगभग 100 गीत तथा स्वरचित एवं वरिष्ठ गीतकारों के गीतों में संगीत, ताल संयोजन, व संगीत संयोजन किया है।वहीं सुप्रसिद्ध फिल्म निर्माता श्री प्रेम चन्द्राकर  के निर्देशन में बनी छत्तीसगढ़ी फिल्म "लोरिक के चंदा" में संगीत सहायक कि महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सम्मान एवं कला प्रस्तुति......

बाल्यकाल में उत्कृष्ट कलाकार सम्मान, झलमला गंगा मईयाँ में उत्कृष्ट तबला वादन सम्मान, साहू समाज द्वारा बालोद में विशेष प्रतिभा सम्मान तथा दलित साहित्य अकादमी नई दिल्ली में सांस्कृतिक दूत सम्मान व भगवान बुद्ध नेशनल फेलोशिप पुरस्कार से आप सम्मानित हैं।कला प्रस्तुतियों के तहत सन् 2012 से वर्तमान समय तक पदमश्री ममता चन्द्राकर के साथ आकाशवाणी, दुरदर्शन में तबला वादन तथा विभिन्न संस्थाओं के अलावा लोकमंच "चिन्हारी" के साथ मुंबई, महाबलेश्वर, शिमला, दिल्ली, भुवनेश्वर, जबलपुर, राजस्थान, भोपाल इत्यादि राज्यों एवं शहरों में अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन किया।ऐसे होनहार और बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्तितत्व को लोक जगत कुनबा सादर शुभकामनाएं देता है,और इनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है।

      


रवि रंगारी
(ब्यूरो चीफ)
लोककला दर्पण
राजनांदगांव
मो.9302675768

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां