संपादकीय - परम्परा एवं रीति

परम्परा एवं रीति

नमस्ते या नमस्कार या नमस्कारम... भारतीय उपमहाद्वीप में अभिनन्दन या अभिवादन करने के सामान्य तरीके हैं। यद्यपि नमस्कार को नमस्ते की तुलना में ज्यादा औपचारिक माना जाता है, दोनों ही गहरे सम्मान के सूचक शब्द हैं। आम तौर पर इसे भारत और नेपाल में हिन्दू, जैन और बौद्ध लोग प्रयोग करते हैं, कई लोग इसे भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर भी प्रयोग करते हैं। भारतीय और नेपाली संस्कृति में ये शब्द लिखित या मौखिक बोलचाल की शुरूआत में प्रयोग किया जाता है। हालाँकि विदा होते समय भी हाथ जोड़े हुए यही मुद्रा बिना कुछ कहे बनायी जाती है। योग में, योग गुरु और योग शिष्यों द्वारा बोले जाने वाली बात के आधार पर नमस्ते का मतलब " मेरे भीतर की रोशनी तुम्हारे अन्दर की रोशनी का सत्कार करती है " होता है शाब्दिक अर्थ में, इसका मतलब है "मैं आपको प्रणाम करता हूँ" यह शब्द संस्कृत शब्द (नमस्): प्रणाम, श्रद्धा, आज्ञा पालन, वंदन और आदर और "आपको" से लिया गया है। किसी और व्यक्ति से कहे जाते समय, साधारण रूप से इसके साथ एक ऐसी मुद्रा बनाई जाती है जिसमें सीने या वक्ष के सामने दोनों हाथों की हथेलियाँ एक दूसरे को छूती हुई और उंगलियाँ ऊपर की ओर होती हैं। बिना कुछ कहे भी यही मुद्रा बनकर यही बात कही जा सकती है। "दीवाली, प्रकाश पर्व या त्यौहार, पूरे भारत में हिन्दुओं द्वारा दीये  जलाकर और रंगोली बनाकर मनाया जाता है।


भारत एक बहु सांस्कृतिक और बहु धार्मिक समाज होने के कारण विभिन्न धर्मों के त्योहारों और छुट्टियों को मनाता है भारत में तीन राष्ट्रीय अवकाश स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और गांधी जयंती को हर्षो उल्लास के साथ मनाया जाता है। इसके अलावा, कई राज्यों और क्षेत्रों में वहाँ के मुख्य धर्म और भाषागत जनसांख्यिकी पर आधारित स्थानीय त्यौहार हैं लोकप्रिय धार्मिक त्यौहार में शामिल हैं। हिन्दुओं का दिवाली, गणेश चतुर्थी, होली, नवरात्रि, रक्षाबंधन और दशहरा कई खेती त्यौहार जैसे की संक्रांति पोंगल और ओणम (डल्लें) भी काफी लोकप्रिय त्यौहार है कुम् का मेला हर 12 साल के बाद 4 अलग -अलग स्थानों पर मनाया जाने वाला एक बहुत बड़ा सामूहिक तीर्थ यात्रा उत्सव है, जिसमें करोंडों हिन्दू हिस्सा लेते हैं। भारत में कुछ त्योहारों कई धर्मों द्वारा मनाया जाता है। इसके उल्लेखनीय उदाहरण हैं हिन्दुओं, सिखों और जैन समुदाय के लोगों द्वारा मनाई जाने वाली दिवाली और बौद्ध धर्म और हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा मनाई जाने वाली बुद्ध पूर्णिमा और इस्लामी त्यौहार जैसे की ईद-उल-फित्र और रमजान भी पूरे भारत के मुसलामानों द्वारा मनाये जाते हैं।


भारतीय व्यंजनों में से ज्यादातर में मसालों और जड़ी बूटियों का परिष्कृत और तीव्र प्रयोग होता है इन व्यंजनों के हर प्रकार में पकवानों का एक अच्छा-खासा विन्यास और पकाने के कई तरीकों का प्रयोग होता है यद्यपि पारंपरिक भारतीय भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा शाकाहारी है लेकिन कई परम्परागत भारतीय पकवानों में मुर्गा, बकरी, मछली और अन्य तरह के मांस भी शामिल हैं। भोजन भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो रोजमर्रा के साथ-साथ त्योहारों में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है कई परिवारों में, हर रोज का मुख्य भोजन दो से तीन दौर में, कई तरह की चटनी और अचार के साथ, रोटी और चावल के रूप में कार्बोहाइड्रेट के बड़े अंश के साथ मिष्ठान  सहित लिया जाता है। भोजन एक भारतीय परिवार के लिए सिर्फ खाने के तौर पर ही नहीं बल्कि कई परिवारों के एक साथ एकत्रित होने सामाजिक संसर्ग बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।


विविधता भारत के भूगोल, संस्कृति और भोजन की एक पारिभाषिक विशेषता है भारतीय व्यंजन अलग-अलग क्षेत्र के साथ बदलते हैं और इस उपमहाद्वीप की विभिन्न तरह की जनसांख्यिकी और विशिष्ठ संस्कृति को प्रतिबिंबित करते हैं। आम तौर पर भारतीय व्यंजन चार श्रेणियों में बाते जा सकते हैं, उत्तर-दक्षिण, पूरब और पश्चिम भारतीय व्यंजन इस विविधता के बावजूद उन्हें एकीकृत करने वाले कुछ सूत्र भी मौजूद हैं मसालों का विविध प्रयोग भोजन तैयार करने का एक अभिन्न अंग है, ये मसाले व्यंजन का स्वाद बढ़ाने और उसे एक खास स्वाद और सुगंध देने के लिए प्रयोग किये जाते हैं। इतिहास में भारत आने वाले अलग-अलग सांस्कृतिक समूहों जैसे की पारसी, मुगल और यूरोपीय शक्तियों ने भी भारत के व्यंजन को काफी प्रभावित किया है।


इतनी विविधता के साथ हर प्रांतों की अपनी रहन सहन बोली और खानपान है जिसमें छत्तीसगढ़ की अपनी इन सभी में अपनी अलग पहचान है। समय के बदलाव के साथ अंचल ही विश्व में परिवर्तन देखी जा रही है। हमारी धरोहर नष्ट होने के कगार पर जा रही है। इन्हीं धरोहरों को सहेजने का काम हमारे द्वारा करने का एक प्रयास आप सभी लोगों के साथ मिलकर करना है। आशा है हम सब इस महान यज्ञ में सफल हो पाएंगे।



संपादक

गोविन्द साहू (साव)

लोक कला दर्पण

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