मन्नत पूरी करते स्वयंभू जोड़े शिव लिंग का मन्दिर

केशकाल

रास्ट्रीय राज मार्ग बही गांव से जगदलपुर मार्ग  में बायीं ओर 4 किमी की दूरी पर बसा  पीपरा बहिगाव  जहा पर रोड से मात्र 4 किमी दूरी पर जोड़ा शिवलिंग और श्री हनुमान जी गणेश जी  का सँयुक्त मन्दिर आज मन्नतों की पूर्ति की आस्था व विश्वास का केंद्र बन चुका है मिली जानकारी अनुसार  उस गांव के स्थानीय निवासी दिनेश पोया ने बताया कि बरसो पूर्व  गांव के नाले में बारिश में जब कोई बैलगाडी वाला पार होकर  जाता था तो उसकी गाड़ी रुक जाती थी तब किसी ने कहा  की देखे क्या है तब शिवलिंग नुमा दो पत्थर दिखायी दिये पर वे गहराई में  थे तब उसको खोदना चालू करना शुरू किए पर देखे की वहाँ पर एक नाग साँप उस पत्थर के चारो ओर  लिपटा था लोग फिर अधूरा कार्य छोड़कर चले गए तब वही के एक पुजारी  मोती लाल जी के पिता जी ने कहा कि यहां पर मन्दिर बनना चाहिए। 


इसी बीच  एक दिन दिनेश पोया उस शिवलिंग रूपी पत्थर के पास खड़े थे तभी उनके सिर पर  एक कोये  ने गन्दगी की वह वही पर खड़े विशाल डूमर के पेड़ पर बैठा था। तब दिनेश पोया ने जाकर नाले में स्नान किया और घर आ गए जब यह बात अपनी माता जी को बताये तब उनकी माता जी ने कहा जा और चार खूंटे लगाकर उस लिंग के सामने दीपक जलाकर आ तब से आज पानी बरसात ठंड या गर्मी का महीना हो वहाँ  जाकर दीपक जलाने का क्रम निरन्तर जारी है।1985-86 से अपनी खुद की दुकान शिव जी की कृपा से प्रारम्भ कर बहुत ही व्यस्त हो गए हैं 2002 में मन्दिर का निर्माण  दिनेश पोया ने अपने विशेष सहयोग और ग्रामीणों का  भी सहयोग लिया गया। सन 2000 में इसके पूर्व जब एक बार पानी नही गिरा तो अखण्ड रामायण  का पाठ किया गया तो मूसलाधार बारिश हुई और लोगो की आस्था बढ़ती गयीं इसी कड़ी में केशकाल निवासी लोकेश गायकवाड़ ने एक नव विवाहिता की ओर से अकेले जाकर मन्नत की तो 3 वर्ष से अलग अलग रह रहे पति पत्नी एक होकर उस मन्दिर में  जाकर श्री फल भेंट किये। इस प्रकार इस मंदिर में लोग आस्था विश्वास से आने लगे है यहां पर महाशिवरात्रि पर्व में बड़ा मेला लगता है जहाँ दूर दूर से भक्त गण आते है इस मंदिर के नीचे पूर्व ससदीय सचिव  शिव नेताम जी स्टॉप डेम बनाया जो आज भी मौजूद है।

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