शैक्षणिक क्षेत्र में,कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है-सुश्री भारती गौते

शैक्षणिक क्षेत्र में,कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है-सुश्री भारती गौते

----------------
भारतवर्ष एक ऐसा मुल्क है, जहाँ गुरूओं का एक महत्वपूर्ण स्थान है।अनंत काल से जहाँ श्रृषियों मुनियों ने अपने होनहार मार्गदर्शन से कई महान हस्तियों विधार्थियो को मुकाम दिया।वही शिक्षा को विश्व स्तर पर नई पहचान दी।इतिहास साक्षी है कि गुरु के सम्मानित स्थान को बहूमूल्य माना गया है।इसी शैक्षणिक विस्तार और उत्थान कि महिला सिपाही सुश्री भारती गौते एक जाना पहचाना नाम हैं।      

बचपन से ही उपजा,जज्बां कुछ करने का.......

        बाल्यकाल से ही प्रतिभा संपन्न भारती गौते जी ने जीवन में कई उतार चढाव देखें तथा इन सभी कठिनाईयों को समय के साथ मात देते हुए आज शैक्षणिक क्षेत्र उच्च पद पर आसीन है।तथा संगीत कि क्षेत्र में भी इनका अलग मुकाम है।इन्होंने संगीत में तक शिक्षा ग्रहण कि हैं।

आज हम चर्चा कर रहे है, पेण्ड्री स्थित नीरज पब्लिक स्कूल की प्राचार्या सुश्री भारती गौते की जिन्होंने हर समस्या का दंबगाई के साथ सामना करते हुए अपने आप को मर्दानी साबित किया हैं।मध्यम परिवार मे जन्मी भारती गौते अपने परिवार की सबसे बडी बहन है।उनकी कार्य कुशलता का प्रभाव इनकी छोटी बहन और भाई में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

आई(माँ)ने सिंखाया,परिस्थितियों से लड़ना......

 सुश्री गौते इन सारी परिस्थितियों को सहज स्वीकार कर आगे बढने कि दक्षता को अपनी माताजी के साहस,विचार और आत्मविश्वास को मानतीं हैं।शुरू से शैक्षणिक क्षेत्र में मेघावी रही भारती गौते जी पुरी ईमानदारी के साथ शाला के विधार्थियों को समय समय पर दिशानिर्देश देती हैं।उनका मानना यह हैं कि आज युवा वर्ग अपने आप को उत्कृष्ट स्थान पर देखता है, खुद के फैसले को सही मानता है। लेकिन उनका मानना है कि युवा वर्ग अपने माता पिता के अनुभवों को साझा करे,और उनका मार्गदर्शन के साथ नया आयाम स्थापित करे।

शैक्षणिक क्षेत्र से मिला सम्मान.......

सुश्री भारती गौते जी को संस्कारधानी कि कई सामाजिक संस्थाओं ने सम्मानित किया है।गत कुछ वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह द्वारा उत्कृष्ठ प्राचार्य सम्मान से नवाजा जा चुका है।वहीं उनके सशक्त मार्गदर्शन हेतु शाला प्रबंधन ने भी इन्हें सम्मानित किया है।

चलते-चलते मन की बात.........

कहा जाता कि विपरीत परिस्थितियों में आदमी टूट कर बिखर जाता हैं।इन सभी से ऊपर उठकर यदि हम किसी मिसाल की बात करें तो सुश्री भारती गौते जी दबंगता की एक मिसाल है।हर परिस्थितियों को मात देकर"जो जीता,वो सिंकदर"की व्याख्या को सार्थक करती है।शैक्षणिक क्षेत्र में सहज ,सरल स्वभाव से अपने छात्र/छात्राओं के बीच अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराने वाली इस शिक्षा सिपाही को उनके कर्तव्य परायणता के शत्-शत् नमन,वंदन हैं।

         रवि रंगारी
        (ब्यूरो चीफ)
      लोककला दर्पण
         राजनांदगांव
   मो.9302675768

टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां