लोककला के लिए समर्पित अनुशरण हैं- संदीप देशमुख

लोककला के लिए समर्पित अनुशरण हैं- संदीप देशमुख


छत्तीसगढ़ की इस माटी में अनगिनत कलाकारों ने अपनी कला कि छँटा बिखेरी है और उन सभी कलाकारों का अपना एक अलग इतिहास रहा है।परंतु लोकविधा के लिए समर्पित अर्जुन्दा की इस पावन माटी कि अपनी अदभूत गाथा हैं।इस माटी से पुष्पित पल्लवित दीपक चन्द्राकर कृत लोक सांस्कृतिक संस्था(लोकरंग)को पुरा छत्तीसगढ़ भंली भाँति जानता हैं।इसी अर्जुन्दा कि पावन माटी में  9 सितंबर सन् 1976 को जन्मे संदीप देशमुख लोककला के सिद्धहस्त कलाकार हैं।बचपन से ही स्कूली सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखाने वाले इस कलाकार ने अनेक लोकनाट्यों, टेली फिल्मों और छत्तीसगढ़ी फिल्मों में अभिनय के साथ लगभग एक हजार मंचो में अपनी सशक्त प्रस्तुति दी हैं।अपने सराहनीय अभिनय को जनमानस तक पहूँचाने,इन्होंने ललित कला निकेतन, लोकरंग अर्जुन्दा,लोक मितान, सृजन नाट्य यात्रा संस्था में अपनी सक्रिय भागीदारी दी,वहीं एकांकी नाटको में इन्होंने "घर कहाँ हैं,विरोध,रथयात्रा,चरणदास चोर इत्यादि में बखूबी अभिनय से अपनी सहभागिता निभाई।

अभिनय से जागरूक किया........

संदीप देशमुख वर्तमान में स्नातकोत्तर उत्तीर्ण होने के साथ पुलिस विभाग में प्रधान आरक्षक के रूप में राजनांदगांव में कार्यरत है।पुलिस विभाग और अपने कर्तव्यों को सामजस्य कर इमानदारी से नौकरी करने वाले इस कलाकार ने जनमानस के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए टेलीविजन सीरियल "सुम्मत,जांगर व टेली फिल्म "नवां अंजोर, कोपल,संवरी,गोमती, बघवा, वन टू का फोर,डाँयल 1091 इत्यादि से लोगों में जागरूकता लाई।इसी क्रम में ये छत्तीसगढ़ी फिल्मों से भी अछूते नहीं रहे।इन्होंने छतीसगढ़ी फिल्म "गोपीचंदा,मोर मन के मीत के अलावा आने वाली अनगिनत फिल्मों में सशक्त भूमिका निभाई।

जिनसे कला की बारीकियां सीखी..

छत्तीसगढ़ के हरफनमौला इस कलाकार में कला कुट कुट कर भरी हैं, और इसका श्रेय वो अपने गुरुओं के देते हैं।जिनमें मुख्य रूप से दीपक चन्द्राकर जी,रामहद्रय तिवारी जी,लक्ष्मण चन्द्राकर जी,प्रेम चन्द्राकर जी,श्रीमती ममता चन्द्राकर जी,मिथलेश साहू जी तथा कुलेश्वर ताम्रकार जी हैं।


अंतिम पडाव....

नौकरी और अभिनय का सांमजस्य.........
 
पुलिस और अनुशासनबद्ध नौकरी से हम सभी परिचित हैं इस विभाग में ना तो छुट्टी का टाईम टेबल होता हैं और ना ही अनुशासन में रियायत, परंतु समय का अनुशासन जरूर होता हैं।इन सभी कर्तव्यों का भंली भाँति पालन करते हुए यह कलाकार अपने भीतर के कलाकार को जिंदा रखकर जनमानस तक अपनी अभिनय क्षमता बरकरार रखा है।ऐसे कर्तव्यनिष्ठ और उम्दा कलाकार को हम लोकजगत के समस्त  कलाकार सलाम करते है।

      
         रवि रंगारी
        (ब्यूरो चीफ)
      लोककला दर्पण
         राजनांदगांव
    मो,9302675768

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