कलाकार का साज,उसकी आत्मा है.. मुन्नालाल केमे



संस्कारधानी की माटी..कला, साहित्य,और खेल नगरी रही हैं।सांस्कृतिक विरासत में आज हम जिस व्यक्ति का जिक्र करने वाले हैं,उस व्यक्ति का नाम है मशहूर सेक्सोफोन वादक मुन्नाभाई का जो संयुक्त परिवार का स्तंभ हैं।


पारिवारिक दायित्व......

मध्यप्रदेश के रतलाम में जन्मे मुन्नालाल का जन्म आठ फरवरी सन् 1959 को हुआ।परिवार में सबसे बड़े होने का दायित्व संम्हालते हुए 30 सदस्यों के साथ संयुक्त परिवार में रहते है।वही महाराष्ट्र के विभिन्न स्थानों से अपने 40 कारीगरों के साथ खुशी खुशी परिवार का संचालन करते है।वर्तमान हालात में सभी पारिवारिक सदस्यों को जोड़कर रखने वाले मुन्नाभाई पाँच भाईयों जिनमें मेघराज, धर्मेंद्र, राजू,और धनराज में सबसे बड़े है।पाँच भाईयों के अलावा इनके स्वंय के पंचरत्न हैं जिनके नाम वर्षा, रिषि, सन्नी,काजोल और प्रिंस हैं।वहीँ जस नाम तस गुण से पल्लवित इनकी पत्नी श्रीमती सरस्वती ने अपनी ममत्व से परिवार को संजोकर रखा है।

बैण्ड की स्थापना........

विगत सत्तर साल से संस्कृति की गौरवगाथा बरकरार रखी भारत बैण्ड की स्थापना सन् 1979 को हुई जो वर्तमान में जय भारत बैण्ड के नाम से प्रसिद्ध है।इस बैण्ड ने विभिन्न संस्थान द्वारा आयोजित बैण्ड प्रतियोगिता में संम्पूर्ण भारत के होनहार बैण्ड को मात देते हुए बिलासपुर, जबलपुर और राजधानी रायपुर में प्रथम स्थान प्राप्त किया।मुन्नाभाई अपने गुरूओं का जिक्र करते हुए बताते हैं कि उन्होंने यह मुकाम अपने पिता स्वं घासीदास केमे, चाचा रतनलाल केमे तथा आर्केस्ट्रा जगत के होनहार रत्न स्वं नरेन्द्र चौहान के मार्गदर्शन में प्राप्त किया।

युवा कलाकारो को संदेश.....

मुन्नालाल केमे वर्तमान पीढी के कलाकारों को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अपने माता पिता और गुरूओं का निस्वार्थ भाव से सेवा करें तथा पाश्चात्य संस्कृति को दरकिनार करते हुए भारतीय संगीत, शास्त्रीय संगीत को महत्वता प्रदान करें ताकि आने वाला भविष्य उन्हें अपना मार्गदर्शक माने तथा भारत के सुधीजनों, गुणीजनों के संगीत को अमरता प्रदान करें।इनकी बहुमूल्य सोंच को समस्त कलाकार नमन करता है तथा इनके उज्जवल भविष्य की कामना करते है।


       
       रवि रंगारी
     (  ब्यूरो चीफ)
     लोककला दर्पण
        राजनांदगांव
  मो.9302675768

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