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                                                                       गोविन्द साहू (साव) एक परिचय

                                                                   

 ---------------------------------------------------------------------------------------------------                                                                    कला ही मेरे जीवन का एकमात्र उद्देश्य

                                                                     आप सभी मेरे गुरु की भांति पथ – प्रदर्शक

                                                                     आगे भी आप लोगों के स्नेह का अभिलाषी

सामान्यतः व्यक्तित्व से अभिप्राय व्यक्ति के रूप-रंग , शारीरिक रचना और व्यवहार से अनुमानित होना माना जाता है |वास्तव में व्यक्तित्व के विकास का क्रम अत्यंत व्यापक तथा जटिल है |व्यक्तित्व का अर्थ मनुष्य के व्यवहार की वह शैली है जिसे वह अपने आतंरिक तथा बाह्य गुणों के आधार पर प्रकट होता है |इस तरह व्यक्तित्व किसी व्यक्ति के समस्त मिश्रित गुणों का वह प्रतिरूप है जो उसकी विशेषताओं के कारण उसे अन्य व्यक्तियों से भिन्न इकाई के रूप में स्थापित करता है |किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के प्रतिबिंब का प्रेक्षण उसके अवलोकन या उसके द्वारा दी गयी क्रिया के आधार पर अनुमानित किया जा सकता है |चिंतनशील, एकांकी, कर्त्तव्य परायण, व्यवहार कुशल, यथार्थ को अपने स्वाभाव के अनुरूप ढालने का प्रयास एक सफल मनुष्य के अंदर समाहित होते है |यहाँ इन उपरोक्त सभी बिन्दुओं को आत्मसात करते अपने कर्तव्यों का बेहतर निर्वहन के लिए वचन बद्धता लिए गोविन्द साहू (साव) अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए लालायित हूँ |मैं आगे इसमें कहाँ तक और कितना सफल हो पाता हूँ इसे भविष्य में छोड़ता हूँ ,लेकिन अभी तक जो भी मैंने कार्य किया है उसमे आप सभी का स्नेह और आशीर्वाद रहा है |इसी का परिणाम है कि मैं अपने लक्ष्य को पाने के लिए अभी तक सफल ही होता आया हूँ |मैंने मूलतः अपने आप को लोक कला और लोक संगीत के लिए समर्पित कर दिया है |मेरे पिछले कार्य पूरी तरह इसके लिए समर्पित रहे है और आगे भी इसी कार्य में ही अपने आप को समर्पित कर देना चाहता हूँ |मैं अपने आप में कितना खरा उतरा ,इसका मूल्यांकन भी आप सभी को करना है |मैं अपने कर्तव्यों का उचित निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करता रहूँ इसके लिए मुझे जो भी त्याग के साथ आवश्यक हो उसे करने में कभी पीछे नहीं हटूंगा |मैंने अपने पिछले कार्यों का लेखा-जोखा आप लोगों के समक्ष रखा है आगे और भी अच्छे ढंग से किस तरह मैं अपने मंजिल तक किस तरह पहुँच सकूं ,इसके लिए आप लोगों की प्रतिक्रिया भी आवश्यक है जिसे मैं सहजता से स्वीकार कर अपने पथ पर आगे बढ़ सकूं |लोक कला दर्पण साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन भी मेरे उद्देश्यों में से एक है जिसमे कला साहित्य और कलाकरों को एक मंच में समाहित कर आंचलिक लोक के संरक्षण और संवर्धन में एक महत्वपूर्ण कार्य हो सके |इसी आशा और अपेक्षा के साथ मेरे अभी तक किये गए कार्य अवलोकनार्थ आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत है –

बचपन से ही मुझे लोक कला के क्षेत्र में रूचि रही है |माता और पिता का स्नेह और प्रेरणा इस क्षेत्र में मुझे भरपूर मिला इसी कारण मैं एक लक्ष्य लेकर इस दिशा में ही अभी तक कार्य करते आ रहा हूँ |स्कूली जीवन से ही मेरा संगीत के प्रति लगाव होने लगा था |इसके बाद मैंने 1987 से राजनांदगांव की लोकप्रिय संस्था चंदैनी गोंदा में जुडकर बेन्जो वादन करने लगा |मेरी यह यात्रा अभी तक निरंतर जारी है |इसके साथ ही अनेक छत्तीसगढ़ी गीतों के ऑडियो ,विडियो व एल्बमों में बेन्जो वादन और संगीत निर्देशन किया है |मेरी संस्था माँ कर्मा के बैनर तले मैंने माँ कर्मा आरती ,श्लोकावली ,और महामंत्र दोहावली का निर्माण किया है |छत्तीसगढ़ी के अलावा हिंदी ,मराठी ,गुजराती व उड़िया में फिल्म व एल्बम का निर्माण मैंने किया है |छत्तीसगढ़ी फिल्म मयारू भौजी ,बनिहार ,अंगना ,नैना ,मोर संग चलव ,मंदराजी के साथ ही के.के कैसेट कंपनी ,सुन्दरानी विडियो वर्ल्ड,शालीमार कैसेट ,टी सीरीज और टी.सी म्यूजिक ,स्वरांजलि स्टूडियो रायपुर में संगीत हेतु अपना योगदान दिया है |राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकारों में अनूप जलोटा जी के भजनामृत ऑडियो कैसेट में बेन्जो वादन तथा मशहूर फ़िल्मी पार्श्वगायकों के गायन में संगीत दिया है |जिला साहू संघ राजनांदगांव में लोक कला सांस्कृतिक प्रकोष्ठ में जिला अध्यक्ष के रूप में दायित्व का निर्वहन मैं कर रहा हूँ |अखिल भारतीय तैलिक वैश्य महासभा में मेरी सक्रीय भूमिका रहती है |छत्तीसगढ़ ,मुंबई व कटक के रिकॉर्डिंग स्टूडियो में ख्यातिप्राप्त गायक गायिकाओं के लगभग 3000 से अधिक गीतों के रिकॉर्डिंग में मैंने संगीत दिया है |लोक कला एवं साहित्य संस्था सिरजन का जिला अध्यक्ष का दायित्व मेरे ऊपर है |इसी तरह कला परंपरा के जिला अध्यक्ष का दायित्व मेरे पास है |इसी कड़ी में शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं को लोक कला के माध्यम से प्रचार - प्रसार का दायित्व भी मैंने समय-समय पर अदा किया है |

साहित्यिक व लोक कला की संस्था लोकसुर में भी मैंने संगीत पक्ष में अपना योगदान दिया है |छत्तीसगढ़ी संस्कृति विभाग द्वारा लोक संगीत सम्बन्धी अनेक दायित्वों का निर्वहन मैंने किया है |इसके साथ ही अनेक सामाजिक व लोक कला की संस्थाओं में अपने दायित्व का निर्वहन करते आ रहा हूँ |आगामी समय में भी लोक कला व लोक साहित्य से सम्बंधित जो भी दायित्व मुझे सौंपा जायेगा उसे पूरा करने वचनबद्ध हूँ एवं सांस्कृतिक लोक कला मंच “लोकधुन” का संचालन कर रहा हूँ |

अतः आप सभी का सानिध्य और स्नेह ही मुझे कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहे है |मुझे आशा ही नही पूर्ण विश्वास है आगे भी मैं अपने दायित्वों के निर्वहन में निश्चित रूप से खरा उतरूंगा |

जय जोहार                                                                                                                                              संपादक

                                                                                                                                                   लोक कला दर्पण

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