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मोहम्मद रफी सुरता - "अजी ऐसा मौका फिर कहाँ मिलेगा?
कविता के लगइस सुग्घर थरहा : विश्वंभर यादव "मरहा "
क्रातिकारी गीतकार : लक्ष्मण मस्तुरिया ("3 नवंबर पुण्यतिथि विशेष")
 पुरखा के सुरता : नाचा के सियान - मंदराजी दाऊ
पवन नइ आंधी रिहिस पवन दीवान जी हा......
अब्बड़ छपय लखन लाल दीपक जी के रचना हा
ऊपर से कठोर और अंदर से नम्र स्वभाव के थे खुमान साव जी
स्वर के पारखी, मधुर सुर के जानकार थे स्व गिरजा कुमार सिन्हा( 9 सितंबर पुण्यतिथि पर विशेष)
सुरता ......महेंद्र माटी के